Hazrat Khwaja Moinuddin Chishti (R.A.) is respected across the world for spreading peace, kindness, and humanity. Many people visit Ajmer Sharif to remember his teachings and spiritual message.
His life inspired people to help the poor, stay humble, and treat everyone with respect. His teachings still guide millions of devotees today.
आपका नाम
हज़रत सय्यदना ख़्वाजा गरीब नवाज़ (रजि.) की हयाते-तैय्यबा एक नज़र में
सने पैदाइश
जाय विलादत
वालिद-ए-मोहतरम
वालेदा मजीदा
सिलसिला-ए-नस्ब
गौस पाक से रिश्ता
ख़्वाजा साहब के भाई-बहन
अज्वाज़े-मुताहरात (बीवियाँ)
औलाद-ए-अमजाद
सैयद मोईनुद्दीन हसन चिश्ती
530 हिजरी बमुताबिक 1135 ई.
सजिस्तान (सीस्तान, सिजज़ी, संजरी)
हज़रत ख़्वाजा सैयद गयासुद्दीन हसन
सैयदा उम्मुलवरा बीबी माहेनूर
आपके वालिद आठवीं पुश्त में हज़रत इमाम मूसा काज़िम के पोते हैं और आपकी वालैदा माजिदा चन्द वास्तों से हज़रत इमाम हसन की पोती हैं। इस तरह ख़्वाजा साहब वालिद के तरफ से हुसैनी और वालैदा की तरफ से हसनी सैयद होने के नाते 'नजीबुत्तराफैन' हैं।
हज़रत गौस पाक और बीबी माहेनूर हज़रत अब्दुल्ला हंबली के पोता-पोती हैं और दोनों के वालिद आपस में भाई थे। इस लिहाज़ से हज़रत गौस पाक ख़्वाजा साहब के रिश्ते में मामू होते हैं।
तारीख की रोशनी में मालूम नहीं होता है कि आपके भाई-बहन थे।
पहला अक़्द - बीबी इस्मतुल्लाह
(सैयद वजीहुद्दीन मशहदी की साहिबजादी)
दूसरा अक़्द - बीबी अमतुल्लाह (एक बादशा की बेटी)
पिसरे अव्वल - हज़रत ख़्वाजा फखरुद्दीन अहमद चिश्ती पिसरे दौम - हज़रत ख़्वाजा जियाउद्दीन अबुल खैर चिश्ती
पिसरे सोम - हज़रत ख़्वाजा हिसामुद्दीन चिश्ती
साहिबज़ादी - बीबी हाफीज़ा जमाल
ख़्वाजा का बचपन खुरासान में
तातार की मचाई हुई तबाही से बचने के लिए हज़रत ख़्वाजा ग्यासुद्दीन अपने क़बीले से निकलकर खुरासान के किसी शहर में बस गये। वहीं ख़्वाजा साहब के बचपन का ज़माना गुज़रा।
दुर्रे-यतीमी
बाद आपकी वालैदा का साया भी सिर से उठ गया। ख़्वाजा साहब 15 साल की उम्र में सन् 545 हिजरी बमुताबिक 1150 ई. में वालिद के विसाल पर वालिद के साए से महरूम हो गये और कुछ अर्से
विरसा
सय्यदना ख़्वाजा साहब को विरसे में एक बाग, पनचक्की और कुछ माल-ओ-दौलत मिला था।
मज्जूब से मुलाकात
हज़रत सय्यदना ख़्वाजा साहब दुर्रे-यतीमी में दुनियावालों के दुख और तकलीफ से बेचैन और फ़िक्रमन्द रहते थे और आपके अख्लाक में बेहद मेहमान नवाज़ी थी। इसी दौर में आपकी मुलाकात हज़रत इब्राहिम कन्दौज़ी मज्जूब से आपके ही के बाग़ में हुई। जहाँ इब्राहिम कुन्दौज़ी ने एक रोटी का टुकड़ा अपने मुंह में चबाकर खाने को दिया, ख़्वाजा साहब के अख़्लाक में इंसानी दिलजोई थी इसलिए आपने वो रोटी का टुकड़ा खा लिया। जैसे ही आपने वो टुकड़ा खाया। आपका दिल और दिमाग रोशन हो गया और फिर आपने अपना विरसा और दौलत गरीबो और बेसहारों में तकसीम करके तलाशें हक में निकल पड़े।
तहसीले उलूम के लिए सफर
इब्राहिम कुन्दौज़ी से मुलाकात के बाद जो ज़िन्दगी में इन्कलाब आया। उसके बाद तहसीले उलूम के लिए बुखारा पहुँचे। जहाँ आपने शैख हिसामुद्दीन बुखारी की खिदमत में रहकर इल्मे ज़ाहिरी हासिल किया और उसके बाद आपने समरकन्द का रुखकर शैख शरफुद्दीन की खिदमत में रहकर बीस बरस की उम्र तक आपने उलूम-ए-हकीका और फुनून-ए-हकीमा में पूरी-पूरी महारत हासिल कर ली।
मदीना-ए-मुनव्वरा में दर्स हदीस
ख़्वाजा गरीब नवाज़ अपने ज़माने के ज़बरदस्त आलिम थे और तीन साल तक मदीना-ए-मुनव्वरा में रहकर हदीस का दर्स दिया।
मुर्शिदे कामिल की तलाश
उलूम-ए-ज़ाहिरी से फरागत के बाद उलूम-ए-रूहानी का शौक इतना भड़का की उसकी तमन्ना में इराक-ओ-अरब के दुश्वार बियाबानों में सैर
बारगाहे-रिसालत में हाजरी
मक्का-ए-मुअज़्ज़मा व
मदीना-ए-मुनव्वरा का सफर
करते रहे। बिलआखिर बगदाद पहुँचे तो आपको पता चला की हज़रत ख़्वाजा उस्माने हरवनी हज़रत जुनैद बगदादी की मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे हैं। चुनाँचें आपका शौके मुरीदी का जज़्बा आपको उसी मस्जिद में ले गया। लिहाज़ा वहाँ पहुँचकर आपने बैत हासिल की और बीस साल अपने पीर-ओ-मुर्शिद की खिदमत में रहे। पीर-ओ-मुर्शिद से आपको खिर्का-ए-खिलाफत अता हुए थे। जो तबर्रुकात आपको सिलसिले के बुज़र्गों से अता हुए थे, सब ख़्वाजा साहब को अता किये। ख़्वाजा उस्मान-ए-हरवनी बारहा फरमाया "मोईनुद्दीन अल्लाह का. मेहबूब है और हमें उसकी मुरीदी पर फख्र है।"
हज-ए-बैतुल्लाह से फारिग होकर ख़्वाजा उस्मानी हरवनी और ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ मदीना-ए-मुनव्वरा पहुँचे और सीधे सरकारे दो आलम के रौजा-ए-अक्दस पर हाज़िर हुए। मुर्शिदे कामिल ने मुरीदे सादिक को हुक्म दिया। 'मोईनुद्दीन आका-ए-दो जहाँ की बारगाह में सलाम अर्ज करो। ख़्वाजा गरीब नवाज़ ने निहायत अदब-ओ-ऐहतराम से कहा 'अस्सलातो वस्सलामो अलैका या सैयदुल मुर्सलीन व खातेमुन्नबीयीन' रौजा-ए-अक्दस से आवाज आई 'व अलैकुम अस्सलाम या कुतुबुल मशाइख बहर-ओ-बर' यह सुनकर हजरत ख्वाजा उस्माने हरवनी ने ग़रीब नवाज़ से फरमाया 'बस तुम्हारा काम बन गया।' जब ख़्वाजा उस्मान हरवनी ने देखा कि दरबार ईलाही में गरीब नवाज़ की दुआ कुबूल हो चुकी है और बारगाहे नबुवत से मकबूलियत की सनद अता हो चुकी और अपनी मोईत में तमाम औसाफ से मशीन फरमा चुके है, तो वापिस बगदाद होने का तस्फिया किया।
आप बगदाद से रवाना हुए और मक्का-ए-मुअज़्ज़मा पहुँचे, ख़ाना-ए-काबा में जब दुआ के लिए हाथ उठाए तो निदा आई 'मोईनुद्दीन हमने तुम्हें और तुम्हारे मुरीदों को फतह व नुसरत अता किया।' आपने सज्दा-ए-शुक्र अदा किया। उसके बाद आप मदीना-ए-मुनव्वरा पहुँचे और सरकारे दो आलम के मजारे अक़्दस पर सलात-ओ-सलाम पेश किए, बशारत हुई 'मोईनुद्दीन तुम ऐन-ए-दीन
हो।' आप दुरूद शरीफ पढ़ते रहे बाद नमाजे ईशा आपकी आँखों में जब उनूदगी छा गई तो हुजूर (स.अ.व.) की ज़ियारत नसीब हुई । हुजूर ने फरमाया 'मोईनुद्दीन हमने तुम्हें बहुक्मे-खुदा सल्तानुल-हिन्द मुकर्रर किया और अजमेर को अपना मस्तकर बनाओ' और एक अनारे बहिश्ती मरहमत फरमाया और आलमे-रूया में हिन्दुस्तान की सैर कराई। फिर्ते खुशी से बगदाद तशरीफ लाए, मुरीद के ये ऐजाजात देखकर हजरत ख्वाजा उस्माने हरवनी खुशी से फरमाते थे, 'मोईनुद्दीन पर मुझे फख है।'
हज़रत ख़्वाजा साहब का विसाल
ख़्वाजा-ए-बुजुर्ग का सने विसाल 6 रजब 633 हिजरी है। जिस रात ख़्वाजा-ए-बुजुर्ग ने वफात पाई थी, चन्द बुजुर्गों ने हुजूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को ख़्वाब में देखा कि हुजूर रसूले पाक फरमा रहे हैं कि 'खुदा का दोस्त मोईनुद्दीन हसन सजज़ी आ रहा है। हम उसके इस्तकबाल के लिए आए हैं।' जब आप वफात पा गए तो आपकी पेशानी मुबारक पर यह तरहरीर नमूदार हुई।
'हाज़ा हबीबुल्लाह मा-त फी हुब्बिल्लाह' तर्जुमा : यह अल्लाह का दोस्त है जिसने अल्लाह की मोहब्बत में वफात पाई ।
ख़्वाजा-ए-बुजुर्ग की
तकफीन-ओ-तदफीन
ख़्वाजा-ए-बुजुर्ग के विसाले मुबारक की ख़बर आग की तरह शहर और शहर के आसपास तमाम कस्बों में फैल गई और लोग हज़ारों की तादाद में आकर जमा हो गए। खुद्दामे खास ने आपको गुस्ल दिया, कफन पहनाया और बड़े साहिबजादे हज़रत ख़्वाजा सैयद फखरुद्दीन ने नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई, फिर आपको आपके हुजरे में दफन किया गया। उस वक़्त हज़रत ख़्वाजा कुतुबुद्दीन दिल्ली में थे। हिन्दुस्तान का आफ़ताबे-विलायत बज़ाहिर गुरूब हो गया, मगर उसकी आबो-ताब कयामत तक बाकी रहेगी।
به انداز نبوت دین کی تبلیغ فرمائی به الفاظ دیگر پیغمبر بندوستان
ख़्वाजा साहब अता-ए-रसूल, नाएबुन्नबी, सुल्तानुल-हिन्द, हिन्दल-वली और ग़रीब नवाज़ के अल्काब से याद किये जाते हैं। हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती गरीब नवाज़ (र.अ.) अपने पीरो मुर्शिद ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगान हज़रत ख़्वाजा उस्मान हरवनी के दामने-तरीक्त से वाबस्ता होकर हुजूर सरकारे दो-आलम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के इशारे पर हिन्दुस्तान में रौनक अफरोज़ हुए। आपकी आमद ने हिन्द को ईमान व इस्लाम का मरकज़ बना दिया। ख़्वाजा गरीब नवाज़ आस्माने-तसव्वुफ के वोह आफताब हैं, जिनसे अन्धरे में उजाला हो गया। सरज़मीने अजमेर से रूहानी फुयूज़ो बरकात का एक ऐसा चश्मा फूटा कि जिससे सारी ज़मीन सेरेआब हो गयी।
सरज़मीने-हिन्द पर नूरे-मोहम्मदी की ये शम्आ हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती गरीब नवाज़ हैं। कुल हिन्द बिला तफरीक मज़हबो-मिल्लत और नस्लो रंग इस शम्आ से फैज़याब होते हैं और कुर्ब-हक के लिये या मोईनुल हक उनकी ज़बानों पर जारी है और क्यूँ न हो कि :-
औलिया राहस्त कुदरत अज़ालाह, तीर गुश्ता बाज़ अज़ गरदा नदीज़े राह तर्जुमा : औलिया को अल्लाह की तरफ से ये कुदरत हासिल होती है कि वोह तीर को रास्ते से वापस कर देते हैं।
जो जमात नुमायां तौर पर तब्लीगे दीने-इलाही में ज़ौक़-ओ-शौक से सरगर्म रही है। वोह सूफिया-ए-किराम की जमात है। ख़्वाजा गरीब नवाज़ (र.अ.) अजमेरी ने जिस इस्तकबाल और शगूफ के साथ इस्लाम की रोशनी फैलाई है, वोह हमारे लिये दर्से बसीरत है और आपके बिल्वास्ते और बिलावास्ता मुरीदैन इस्लाम की शम्भे हिदायत लेकर हिन्दुस्तान में फैल गये और निहायत तन्द ही से इशाते-दीन का काम किया। उनके मसाई जमीला से तमाम हिन्द इस्लाम से मुनव्वर हुआ।
ख़्वाजा गरीब नवाज़ (र.अ.) ने अपनी ज़िन्दगी में अम्ली तौर पर इन सुनहरी उसूलों यानि इन्सानी यक़्ता पर ऐन मोहब्बत, भाई-चारगी और मज़हबी रवादारी को परवान चढ़ाया। ये एक तारीखी हकीकत है कि 850 साल से ख़्वाजा गरीब नवाज़ का दरबार हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाइ और तमाम मज़हब के मानने वालों के इत्तेहाद का एक ऐसा अज़ीम मरकज़ है। जिसकी मिसाल कहीं और नज़र नहीं आती। ख़्वाजा गरीब नवाज़ (र. अ.) के फैज़े-रूहानी का अदना करिश्मा था कि आपकी ख़िदमत में हाज़िर होने वालों के कुलूब की कशाफत दूर होकर दिलों में इमानो-यकीन की नूरानियत उजागर हो जाती थी और आज आपके मज़ारे अक़दस की ज़ियारत व हाज़री से दिलों की सियाही दूर हो जाती है और कल्ब-ओ-रूह को सुकून हासिल होता है। ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का दरबार रूहानी फुयूज़ो बरकात का शरे दरिया है। जो हमावक्त बह रहा है और एक आलम सेरेआब हो रहा है। ख़ल्कत है कि उमड़ी चली आ रही है, हर मज़हब के अमीर हो या गरीब, छोटा हो या बड़ा, हाकिम हो या महकूम हाज़िरे दरबार होते आ रहे हैं और ख़्वाजा साहब की फुयूज़ो बरकात से मालामाल हो रहे हैं।
नजीबुत्तरफैन
इमामुल अम्बिया-ए-वल मुरसलीन हुजूर अहमदे मुज्तबा हज़रत मोहम्मद मुस्तफा स.अ.व.
हज़रत फातिमातुज़्ज़ेहरा सलामुल्लाह अलैहिआ व इमामुल विलाया हजरत इमाम अली इब्ने अबी तालिब सलामुल्लाह अलैह
1. हजरत इमाम हुसैन (अ.स.)
1. हजरत इमाम हसन (अ.स.)
2. हजरत इमाम जैनुल आबेदीन (अ.स.)
2. हजरत हसन मूसन्ना
3. हजरत इमाम बाकर (अ.स.)
3. हजरत अब्दुल्ला महज़
4. हजरत इमाम जाफर सादिक (अ.स.)
4. हजरत मूसा जौन
5. हजरत इमाम मूसा कासिम (अ.स.)
5. हजरत अब्दुल्ला
6. हजरत ख्वाजा इदरीस
6. हजरत सैयद मूसा
7. हजरत ख़्वाजा इब्राहिम
7. हजरत सैयद दाऊद
8. हजरत ख़्वाजा अब्दुल अजीज
8. हज़रत मोहम्मद मौरिस
9. हजरत ख्वाजा नजमुद्दीन ताहिर
9. हजरत याह्या ज़ाहिद
10. हजरत ख्वाजा अहमद हुसैन
10. हजरत सैयद अब्दुल्लाह हमली
11. हजरत ख्वाजा कमालुद्दीन
हजरत सैयद दाऊद
हजरत ख्वाजा सैयद गयासुद्दीन हसन चिश्ती व हज़रत सैयदा बीबी उम्मुलवरा बीबी माहेनूर
हजरत सैयद अबू साले मूसा जंगी
हजरत सैयदा बीबी
हजरत सैयद शेख मोहिय्युद्दीन अब्दुल कादिर जीलानी
उम्मुलवरा बीबी माहेनूर
हजरत ख्वाजा सैयदना
मोइनुद्दीन हसन चिश्ती
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ सैयदना मोईनुद्दीन हसन चिश्ती संजरी सुम्मल अजमेरी ख़्वाजा गरीब नवाज़ (रजि.) का (नजीबुत्तरफैन) मादरी व पिदरी शिजरा-ए-मुबारक
हज़रत शेख सैयद मोहियुद्दीन अब्दुल कादिर जीलानी गौसे पाक (रजि.) तमाम मुअरेखीन व तज़कीरा निगार किताब 'मिरातुल अन्साब' के शिजरा-ए-नस्ब से मुत्तफिक हैं। यानि आप सादाते हुसैनी में से हैं। अलबत्ता वालेदा से हसनी सैयद हैं।
बिस्मिल्ला हिर्रहमा निर्रहीम
शजर-ए-तरीक्त चिश्तिया
1. इलाही बहुरमते सैय्यिदिल मुरसलीन खातमिन नबीईन सैय्यिदुना अहमदे मुजतबा हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
2. इलाही बहुरमते मौला कायनात अमीरुल मोमिनीन हज़रत सैय्यिदुना अली बिन अबी तालिब कर्रमल्लाहु तआला वजहा।
3. इलाही बहुरमते बरकते इमामुल औलिया शम्सुल मशाइख़ ख़्वाजा हसन अल बसरी रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
4. इलाही बहुरमते बरकते ताजुल औलिया कमरुल मशाइख़ ख़्वाजा अब्दुल वाहिद इब्ने ज़ैद रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
5. इलाही बहुरमते बरकते जमालुल औलिया फख़रुल मशाइख जमालुद्दीन फुजैल इब्ने अयाज़ रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
6. इलाही बहुरमते बरकते शौकतुल औलिया हशमतुल मशाइख सुल्तान इब्राहीम अदहम बल्खी रहमतुल्लाहि तआला अलैह ।
7. इलाही बहुरमते बरकते बदरुल औलिया सिराजुल मशाइख सदीदुद्दीन हुजैफा अल मरशई रहमतुल्लाहि तआला अलैह ।
8. इलाही बहुरमते बरकते अमीनुल औलिया शम्सुल आरिफीन अमीनुद्दीन हुबैरा अल बसरी रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
9. इलाही बहुरमते बरकते नय्यिरुल औलिया कमरुल आरिफीन मिमशाद दिन्नौरी रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
10. इलाही बहुरमते बरकते ताजदारे वलायत इमामुल आरिफीन अबू इसहाक शामी चिश्ती रहमतुल्लाहि तआला अलैह ।
11. इलाही बहुरमते बरकते अबदाले दौरां कुतुबुल आरिफीन अबू अहमद अबदाल चिश्ती रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
12. इलाही बहुरमते बरकते बुरहानुल औलिया वाकिफे असरारे जली व ख़फी ख़्वाजा अबू मुहम्मद मुक्तदी रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
13. इलाही बहुरमते बरकते नासिरुल औलिया नुसरतुल आरिफीन अबू यूसुफ चिश्ती रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
14. इलाही बहुरमते बरकते कुतुबे रब्बानी दलीलुल आरिफीन मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
15. इलाही बहुरमते बरकते अशरफुल औलिया कबीरुल आरिफीन हाजी शरीफ ज़िन्दनी रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
16. इलाही बहुरमते बरकते ताजदारे औलिया इमदादुल आरिफीन उसमान हारूनी रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
17. इलाही बहुरमते बरकते माशूके रब्बानी मुईनुल औलिया किब्लतुल आरिफीन मखदूमुल आलम सुल्तानुल अकालीम वल मशरिक ख़्वाजाए ख़्वाजगान मुईनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाहि तआला अलैह।
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगान सैयदना मोइनुद्दीन हसन चिश्ती संजरी सुम्मुल अजमेरी ग़रीब नवाज़ के
जा-नशीन
हज़रत ख़्वाजा कुतुबूद्दीन बख्तियार काकी हज़रत ख़्वाजा फखरूद्दीन गुरदेज़ी सुम्मुल अजमेरी
खुल्फा व मुरीदान
1. हज़रत शैख सूफी हमीदुद्दीन नागौरी
2. हज़रत शैख निज़ामुद्दीन
3. हज़रत शैख नियाजुल्लाह खुरासानी
4. हज़रत ख़्वाजा मोहीयुद्दीन
5. हज़रत शैख अहमद काबुली
6. हज़रत सुल्तान शाह
7. हज़रत कादिर सईद
8. हज़रत अहमद कहार
9. हज़रत सुब्हान अली खान चमकी
10. हज़रत अमीर बुरहान सदासुहाग
11. हज़रत हादी मोहम्मद अफरत
12. हज़रत निज़ाम खान तुर्क
13. हज़रत मर्दगाद खान तुर्क
14. हज़रत मोहम्मद असगर बहारी
15. हज़रत नेअनत अहमद सफा
16. हज़रत रमादा किब्र शाह
17. हज़रत सरदार अहमद
18. हज़रत मारूफ शाह कुरैशी
19. हज़रत सुफिया अहमद
20. हज़रत अज़ीज़ अहमद शाह
21. हज़रत करीम शोऐब
22. हज़रत हुसैन दाऊद जी
23. हज़रत अबुल फराह कुरैशी
24. हज़रत शैख हमीदुद्दीन
25. हजरत शैख अहमद
26. हज़रत शैख मोहम्मद ज़ाहिद तुर्क
27. हज़रत शैख अब्दुल्लाह बयाँबानी
28. हजरत शेख सदरूद्दीन किरमानी
29. हज़रत ख़्वाजा कुदवतुद्दीन काज़ी कुद्वा
30. हज़रत शैख मोहम्मद तुर्क नारनोली
31. हज़रत शैख मोहम्मद यादगार सब्ज़वारी
32. हज़रत इमामुद्दीन दमिश्की
33. हज़रत अहमद शिहाब कूफी
34. हज़रत दाऊदुद्दीन
35. हज़रत गुलाम हादी तुर्क
36. हज़रत अहमद खान दरानी
37. हज़रत कुरान अहमद
38. हज़रत अजहर खान तुर्क
39. हज़रत फकीर मोहम्मद
40. हजरत अहमद खान गलजी
41. हज़रत किवाल असगर कंधारी
42. हज़रत सोगी बहादुर शाह
43. हज़रत मुराद बेग मुगल
44. हज़रत शोऐब खान तुर्क
45. हज़रत महमूद अहमद
46. हज़रत गरीब असगर
47. हजरत जहीरुद्दीन
48. हज़रत अब्दुल्लाह असगर
49. हज़रत अब्दुल गफ्फार
50. हज़रत मोशीयोख इराकी
51. हज़रत याकूब
52. हज़रत करीम अहमद शाह
53. हजरत ख्वाजा अहमद शाह
54. हज़रत ख़्वाजा बुरहानुद्दीन
55. हज़रत शम्शुद्दीन फोकानी
56. हज़रत शैख वजीहुद्दीन खुरासानी
57. हज़रत सुल्तान अबु मसूद गाजी
58. हज़रत शैख अली संजरी

.webp)
Contact Gaddi Nasheen Ajmer +918529671277
Love Towards All Malice Towards None