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Ajmer Sharif Dargah Mai Chadar Kaise Chadhaye Guide

अजमेर शरीफ दरगाह में चादर कैसे चढ़ाएं यह सवाल बहुत लोग सर्च करते हैं, खासकर जो पहली बार हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (R.A.) की बारगाह में ज़ियारत के लिए जाते हैं। चादर चढ़ाना सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि यह दिल से निकली मोहब्बत और अकीदत का इज़हार है। इस लेख में आपको आसान तरीके से पूरा तरीका समझाया गया है ताकि आप सही तरह से चादर पेश कर सकें।


चादर पेश करने की अहमियत और पुरानी रिवायत

अजमेर शरीफ दरगाह में चादर चढ़ाने की रिवायत बहुत पुराने समय से चली आ रही है। हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (R.A.) की बारगाह में दुनिया भर से आने वाले चाहने वाले अपनी तरफ से चादर का नजराना पेश करते हैं। यह एक ऐसा तरीका है जिससे इंसान अपनी मोहब्बत और इज्जत को जाहिर करता है।


इतिहास में भी देखा गया है कि पुराने समय के बादशाह भी यहां आकर बुहोत अदब के साथ चादर पेश करते थे। हर दौर में बड़े बड़े लोग इस दरगाह की तरफ खिंचे चले आए हैं। आज भी जब उर्स का समय आता है तो भारत के प्रधानमंत्री भी खास तौर पर चादर पेश करते हैं। यह इस बात का सबूत है कि यह दरगाह हर दिल के करीब है।


चादर पेश करने का मतलब होता है अपने दिल की मोहब्बत को एक तोहफे के रूप में पेश करना। हर इंसान चाहता है कि वह भी अपनी तरफ से कुछ पेश करे, और यही वजह है कि चादर को सबसे बड़ा मोहब्बत का तोहफा माना जाता है।


अजमेर शरीफ दरगाह में चादर कैसे चढ़ाएं स्टेप बाय स्टेप

सबसे पहले अपनी नियत साफ रखें। जब भी आप दरगाह जाएं तो दिल में यह ख्याल रखें कि आप अल्लाह की रज़ा के लिए और हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (R.A.) के वसीले से दुआ करने आए हैं।


दरगाह के अंदर आपको आसानी से चादर मिल जाती है। आप अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से चादर ले सकते हैं। कुछ लोग सादी चादर लेते हैं और कुछ लोग 42 मिटर की पूरे मज़ार पाक की और कुछ लोग फूलों से सजी हुई चादर पसंद करते हैं।


जब आप दरगाह के अंदर जाएं तो अदब और सम्मान का पूरा ध्यान रखें। चादर को दोनों हाथों से पकड़कर ले जाएं। बहुत से लोग चादर को सिर पर रखकर ले जाते हैं, जो एक इज्जत का तरीका माना जाता है।


मजार अकदस के पास पहुंचने के बाद चादर को आराम से बिछाया जाता है। इस मौके पर गद्दी नशीन सैयद फखर नवाज चिश्ती, जो ख्वाजा गरीब नवाज के खादीम हैं, उनकी रहनुमाई में चादर पेश की जाती है। वह पूरी अदब के साथ उनके पास आने वाले जाईरिन को रूहानी तरीका दिखाते हैं ताकि चादर सही तरीके से चढ़ सके। और जब चादर पेश करदी जाती है मज़ार अकदस पे तो उसी वक्त आपके सरपे रखकर दुआ करते हैं, उसी व्यक्त अपने दिल से दुआ करें और अपनी हर बात अल्लाह के सामने रखें।


अगर कोई शख्स खुद हाज़िर नहीं हो सकता, तो गद्दी नशीन सैयद फखर नवाज चिश्ती जो ख्वाजा गरीब नवाज के खादीम हैं, आप इस वेबसाइट के ज़रिये उनसे जुड़ सकते हैं और अपनी चादर, नियाज़, नजराना ऑनलाइन भी पेश करवा सकते हैं। किसी भी तरह का रुहानी काम हो, आप उनसे आसानी से संपर्क कर सकते हैं।


चादर चढ़ाने के साथ आप फूल भी पेश करते हैं और कुछ समय वहां बैठकर दुआ कर सकते हैं। यह वक्त बहुत खास होता है, इसलिए इसे दिल से महसूस करें।


अजमेर शरीफ दरगाह में चादर चढ़ाते हुए जायरीन

चादर चढ़ाते समय ध्यान रखने वाली बातें

दरगाह में जाते समय हमेशा सादगी और अदब का ख्याल रखें। भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए धैर्य बनाए रखें और दूसरों का भी सम्मान करें।


चादर चढ़ाते समय किसी तरह की जल्दबाजी न करें। यह अक़ीदत का हिस्सा है, इसलिए इसे शांति और सुकून के साथ करें।


अगर आप कोई नजराना, offering या gifted money देना चाहते हैं तो वह भी अदब के साथ दें। हमेशा साफ नीयत और सच्चे दिल से दुआ करें।


दुनिया भर से आने वाले चाहने वाले

अजमेर शरीफ दरगाह में सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से लोग आते हैं। हर इंसान अपने साथ अपनी मोहब्बत लेकर आता है और चादर के रूप में उसे पेश करता है।


यह दरगाह एक ऐसी रूहानी जगह है जहां हर इंसान को सुकून मिलता है। चाहे वह किसी भी देश या धर्म से हो, यहां आकर हर कोई अपने दिल की बात कहता है।


चादर पेश करना एक मोहब्बत का इज़हार

चादर चढ़ाना एक बहुत गहरी भावना से जुड़ा हुआ है। यह सिर्फ एक कपड़ा नहीं होता, बल्कि इसमें इंसान की मोहब्बत, उम्मीद और दुआएं शामिल होती हैं।


सदियों से यह रिवायत चलती आ रही है और आज भी उतनी ही मजबूती से निभाई जा रही है। हर इंसान के दिल में यह ख्वाहिश होती है कि वह भी अपनी तरफ से कुछ पेश करे, और चादर इस मोहब्बत का सबसे खूबसूरत तरीका है।


जब आप चादर पेश करते हैं तो यह एक ऐसा पल होता है जब आप अपने रब के करीब महसूस करते हैं। यही वजह है कि लोग बार बार इस दरगाह की तरफ खिंचे चले आते हैं।



 
 

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