Khwaja Garib Nawaz Urs Ki Puri Jankari Hindi Mein padhkar aap Urs Ajmer Sharif 2026 ki important dates, Chatti Sharif, Bara Qul, Jannati Darwaza aur Ziyarat se judi zaruri maloomat hasil kar sakte hain.
Har saal lakhon aqeedatmand Ajmer Sharif pahunchkar Hazrat Khwaja Garib Nawaz (R.A.) ki dargah mein dua aur chadar pesh karte hain. Ye roohani safar mohabbat, aman aur barkat ka paigham deta hai.
हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ (र.अ.) का उर्स पूरी दुनिया में बहुत अकीदत और अदब मोहब्बत के साथ मनाया जाता है। हर साल लाखों चाहने वाले लोग अजमेर शरीफ पहुंचकर आस्ताना अकदस दरगाह शरीफ में हाज़िरी देते हैं, दुआ करते हैं और रूहानी सुकून हासिल करते हैं। उर्स सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इंसानियत, मोहब्बत और अमन का पैगाम है। 2026 में उर्स अजमेर शरीफ 11 दिसंबर से 19 दिसंबर तक मनाया जाएगा।
इंडिया ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों से लोग अजमेर शरीफ आते हैं। उर्स के दौरान पूरा अजमेर रौशनी, इत्र, फूलों खुशबू और दुआओं के माहौल में बदल जाता है। दरगाह शरीफ में हर तरफ दरूद ओ सलाम, कुरान ख्वानी और कव्वाली की आवाज़ सुनाई देती है। यही वजह है कि उर्स अजमेर शरीफ को दुनिया के सबसे मशहूर सूफी आयोजनों में गिना जाता है। सूफिसम इंडिया के सब कॉन्टीनेंट मे अजमेर शरीफ से पोहउचा हज़रत ख्वाजा मॉइनूद्दीन चिश्ती र.अ की बरकतों से।
उर्स 2026 की अहम तारीखें
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झंडा चढ़ाने की रस्म: 05 दिसंबर 2026
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उर्स शुरू: 11 दिसंबर 2026
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जन्नती दरवाज़ा खुलेगा: 11 दिसंबर 2026
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नमाज़ ए जुमा: 11 दिसंबर 2026
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छठी शरीफ: 16 दिसंबर 2026
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बड़ा कुल: 19 दिसंबर 2026
उर्स शुरू होने से पहले झंडा चढ़ाने की रस्म होती है, जिसके बाद दरगाह शरीफ में रूहानी माहौल और भी बढ़ जाता है। अकीदतमंद अलग-अलग शहरों और देशों से आना शुरू कर देते हैं। उर्स के दिनों में अजमेर की गलियां देर रात तक जागती रहती हैं और हर तरफ इबादत और दुआ का माहौल दिखाई देता है।

उर्स का मतलब क्या होता है
सूफी परंपरा में “उर्स” का मतलब अल्लाह से रूहानी मिलन माना जाता है। इसी वजह से सूफी संतों का उर्स गम के बजाय रूहानी खुशी और इबादत के तौर पर मनाया जाता है। हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (र.अ.) ने अपनी पूरी जिंदगी इंसानियत, मोहब्बत और गरीबों की मदद का पैगाम दिया। इसी कारण उन्हें “गरीब नवाज़” कहा जाता है।
आज भी लोग दरगाह शरीफ में पहुंचकर अपने दिल की दुआएं मांगते हैं। कोई रोज़गार के लिए दुआ करता है, कोई सेहत के लिए और कोई अपने घर की खुशहाली के लिए। माना जाता है कि सच्चे दिल से मांगी गई दुआ यहां जरूर कबूल होती है।

जन्नती दरवाज़ा की अहमियत
उर्स के दौरान जन्नती दरवाज़ा खोला जाता है, जिसकी बहुत खास अहमियत मानी जाती है। 2026 में यह 11 दिसंबर को खुलेगा। हजारों लोग इस दरवाज़े से गुजरने के लिए लंबी कतारों में खड़े रहते हैं। अकीदतमंदों का मानना है कि अदब और मोहब्बत के साथ जन्नती दरवाज़े से गुजरना बहुत बड़ी रूहानी नेमत है।
उर्स के शुरुआती दिनों में सबसे ज्यादा भीड़ जन्नती दरवाज़ा खुलने के समय देखने को मिलती है। इसी वजह से बहुत से लोग पहले से ही अजमेर पहुंच जाते हैं।

छठी शरीफ क्यों खास होती है
छठी शरीफ उर्स का सबसे अहम दिन माना जाता है। 2026 में छठी शरीफ 16 दिसंबर को होगी। इस दिन दरगाह शरीफ में खास दुआ, कुरान ख्वानी, फातिहा और दरूद ओ सलाम पढ़ा जाता है। हज ारों लोग रातभर इबादत और दुआ में शामिल रहते हैं।
कई लोग अपनी मुराद पूरी होने पर छठी शरीफ के दिन चादर और नज़राना पेश करते हैं। इस दिन दरगाह शरीफ का माहौल बहुत ज्यादा रूहानी और भावुक हो जाता है।
बड़ा कुल क्या होता है
बड़ा कुल उर्स का आखिरी दिन होता है। 19 दिसंबर 2026 को बड़ा कुल होगा। इस दिन कुरान शरीफ की तिलावत और खास दुआओं के साथ उर्स का समापन किया जाता है। दरगाह शरीफ को गुलाब जल से धोया जाता है और पूरी दुनिया में अमन और खुशहाली की दुआ की जाती है।
बड़ा कुल के दिन भी बड़ी संख्या में लोग दरगाह शरीफ पहुंचते हैं। कई अकीदतमंद उर्स के आखिरी दिन हाज़िरी देना सबसे ज्यादा मुबारक मानते हैं।
चादर पोशी और नज़राना
उर्स के दौरान चादर पोशी की रस्म सबसे मशहूर होती है। लोग फूलों से सजी चादर दरगाह शरीफ में पेश करते हैं। यह मोहब्बत और अकीदत की निशानी मानी जाती है। बहुत से लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर चादर पेश करते हैं।
अगर कोई अजमेर शरीफ नहीं आ सकता, तो वह घर बैठे भी चादर, देग या नज़राना पेश कर सकता है। इसके लिए गद्दी नशीन अजमेर शरीफ सैयद फ़खर नवाज़ चिश्ती से संपर्क किया जा सकता है: +91 85296 71277
बड़ी देग और लंगर
अजमेर शरीफ की बड़ी देग पूरी दुनिया में मशहूर है। उर्स के दिनों में हजारों लोगों के लिए लंगर तैयार किया जाता है। यहां किसी धर्म, जाति या भाषा का फर्क नहीं किया जाता। हर इंसान को बराबरी के साथ खाना खिलाया जाता है।
ख्वाजा गरीब नवाज़ (र.अ.) की सबसे बड़ी तालीम यही थी कि भूखे को खाना खिलाओ, गरीब की मदद करो और इंसानियत की सेवा करो। यही वजह है कि उर्स के दौरान लंगर की खिदमत को बहुत बड़ा सवाब माना जाता है।
कव्वाली और सूफी माहौल
उर्स अजमेर शरीफ में हर शाम कव्वाली का खास कार्यक्रम होता है। मशहूर कव्वाल अल्लाह, रसूल पाक और ख्वाजा गरीब नवाज़ (र.अ.) की शान में सूफी कलाम पेश करते हैं। दरगाह शरीफ का माहौल पूरी तरह रूहानी हो जाता है।
कव्वाली सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि सूफी पैगाम का एक खूबसूरत तरीका है। लोग कव्वाली सुनते हुए दुआ करते हैं और अपने दिल को सुकून महसूस करते हैं।
अजमेर शरीफ आने वालों के लिए जरूरी बातें
अगर आप उर्स 2026 में अजमेर शरीफ आने का प्लान बना रहे हैं, तो होटल पहले से बुक कर लें क्योंकि उर्स के दिनों में बहुत ज्यादा भीड़ होती है। दिसंबर में मौसम ठंडा रहता है, इसलिए गर्म कपड़े साथ रखें। दरगाह शरीफ में सादे और अदब वाले कपड़े पहनकर जाएं।
रेल और सड़क दोनों रास्तों से अजमेर आसानी से पहुंचा जा सकता है। उर्स के दौरान प्रशासन भी खास इंतजाम करता है ताकि सभी ज़ायरीन आराम से ज़ियारत कर सकें।
ख्वाजा गरीब नवाज़ (र.अ.) का उर्स सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाला रूहानी सफर है। यहां हर इंसान मोहब्बत, अमन और दुआ की तलाश में आता है। अगर आप भी उर्स अजमेर शरीफ 2026 में हाज़िरी देने का इरादा रखते हैं, तो अभी से तैयारी शुरू कर दें और इस मुबारक माहौल का हिस्सा बनें।
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